वाराणसी: लॉकडाउन से प्रकाशक असमंजस में, स्कूल ना खुलने से हो रहा है आर्थिक संकट

वाराणसी.संवाददाता। लॉकडाउन ने पुस्तक प्रकाशकों को करोड़ों का झटका दिया है। लॉकडाउन के बढ़ने से स्कूलों के नये सत्र को लेकर प्रकाशक असमंजस की स्थिति में हैं और उत्पन्न हालातों के कारण करोड़ों के नुकसान की आशंकाओं के चलते उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। वाराणसी प्रकाशक महासंघ ने विज्ञप्ति जारी कर यह प्रकाशकों की चिंता जाहिर की है।

रवि शंकर सिंह, महामंत्री, वाराणसी प्रकाशक संघ

प्रकाशकों ने केन्द्र व राज्य सरकार से अपील की है कि प्रकाशकों को बैंक कर्ज में लगने वाले ब्याज को छः माह के लिए समाप्त करने के साथ ही बिजली बिल अगले तीन माह के लिए पचास प्रतिशत करने के साथ फिक्सड चार्ज समाप्त किया जाए। लॉकडाउन की अवधि में कर्मचारियों को वेतन का आधा भुगतान करने का आदेश जारी करने का आग्रह किया है।

अप्रैल मह से शुरू शैक्षिक सत्र के लिए प्रकाशकों ने पाठ्प पुस्तकों की आपूर्ति के लिए छह माह पूर्व ही बैकों से कर्ज लेकर अपनी तैयारी प्रारम्भ कर ली थी। पुस्तकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किताबें भी तैयार करा ली गयी थीं, लेकिन लॉकडाउन के चलते सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई।
प्रकाशकों का कहना है कि एक ओर जहाँ कारोबार चौपट होने के कारण स्वयं के भविष्य की चिंता सता रही है वहीं दूसरी ओर लाॅकडाउन के कारण गत वर्ष के भुगतान के भी अधर में लटकने की भी चिंता है।

आमतौर पर दुकादार प्रकाशकों का भुगतान अप्रैल माह से देना शुरू करते हैं, लेकिन जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं उसके बाद प्रकाशकों को गत वर्ष का भुगतान भी मिलता दिखाई नहीं दे रहा है।प्रकाशकों की यह भी चिंता है कि कारोबार न होने से आखिर बैंकों का कर्ज, कर्मचारियों का वेतन, बिजली का बिल, किराया आदि कैसे अदा कर पायेंगे।
व्यापारी नेता व वाराणसी प्रकाशक संघ के अध्यक्ष राकेश जैन के अनुसार प्रकाशक आर्थिक संकट से घिर गये हैं, प्रकाशकों ने बैंकों से काफ़ी कर्ज लेकर व्यापार में लगाया हुआ है, जिसका व्याज देने की स्थिति में भी वे अब नहीं दिख रहे।
प्रमुख प्रकाशक व वाराणसी प्रकाशक संघ के महामंत्री रविशंकर सिंह के अनुसार हर वर्ष मार्च तक दुकानदारों को किताबें उपलब्ध करा दी जाती हैं, जिसका कुछ भुगतान अप्रैल से आना प्रारम्भ हो जाता है लेकिन इस वर्ष ऐसा मुमकिन दिखाई नहीं लग रहा।

 

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