कहीं अखिलेश की रणनीति में तो नहीं फंस गए बीजेपी के प्रवक्ता?

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एके चित्रांश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस ट्विट में एक रणनीति है. सत्ता से नाराज जनता को संदेश कि मैं ही तुम्हारा नेता हूं. एक बेचारगी के साथ संवेदनशील जनता की सहानुभूति बटोरने की सोची समझी रणनीति. कन्नौज में अखिलेश यादव की सभा में हंगामे के बाद, प्रदेश की राजनीति में अचानक से सरगर्मी बढ़ गई. अखिलेश यादव के बयान कि उन्हें जान का खतरा है बताने के बाद और प्रेस कांफ्रेंस कर फोन पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का खुलासा करेंगे के बाद तो सूबे की राजनीति का तीर चल पड़ा जो सीधे बीजेपी के खेमे में गिरा.

और उधर बीजेपी के प्रवक्ताओं ने भी देरी नहीं की. सीधे अखिलेश यादव पर हमलावर हुए लेकिन बीजेपी खेमे से सुनियोजित प्रतिक्रिया आई जय श्रीराम के नारे पर जबकि अखिलेश यादव ने फोन पर जान से मारने की धमकी मिलने की बात की और आरोप लगाया कि ये बीजेपी का हो सकता है, जिसकी जानकारी वो प्रेस कांफ्रेस करके देंगे.

जो भी हो, बीजेपी के प्रवक्ताओं ने पार्टी पर आरोप का जवाब तो नहीं दिया लेकिन जय श्री राम के नारा लगाने वाले पर भड़के अखिलेश यादव पर ठीक वैसे ही हमलावर हुए जैसा कुछ दिन पहले दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर हनुमान जी के दर्शन पर भड़के थे. अरविंद केजरीवाल बेचारों की तरह हनुमान चालीसा सुनाकर बीजेपी की जमीन पर झाडू फेर गए.

चुनाव बाद बीजेपी ने परिणामों आंकलन किया और शीर्ष नेतृत्व ने ऐसे बयानों से दूरी बना ली है. जाहिर तौर बीजेपी के हार्ड लाइन पॉलिटिक्स के विरोध में अरविंद केजरीवाल का सेंटर राइट पॉलिटिक्स बीस पड़ा और दिल्ली चुनाव के नतीजे सबके सामने हैं. ऐसे में बड़ा सवाल है कि कहीं यूपी बीजेपी के प्रवक्तागण अखिलेश यादव के रणनीति में तो नहीं फंस गए. अखिलेश यादव जानते हैं कि प्रदेश की राजनीति में फिलहाल बीजेपी के विपक्ष में उनकी पार्टी ही खड़ी है, कांग्रेस आधार बनाने में लगी है जबकि बीएसपी में टूट फूट जारी है.

बहरहाल अखिलेश यादव का तीर कितने निशाने पर लगा है वह आने वाले कुछ दिनों में साबित हो जाएगा लेकिन दिल्ली चुनाव के हिन्दुत्व के अत्याधिक प्रयोग से बीजेपी को नुकसान होने का एहसास पार्टी नेताओं को हो गया है.

फिलहाल तो बिहार के कद्दवार नेता गिरिराज सिंह को खामोश रहने को कहा गया है. लेकिन हालात यही रहें तो यूपी में भी नेताओं को धर्म के नाम पर राजनीति करने की जगह विकास और राष्ट्र निर्माण की राजनीति करने और बयान देने की नौबत आ सकती है क्योंकि इस देश की जनता बेचारगी पर तरस खाती है. वैसे ही जैसे बतौर गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी हरदम परेशान करने वाली मीडिया और कांग्रेस के 2014 में सबक सिखाया.

जानकारी के मुताबिक महिला सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री अपनी कार्यकाल के दौरान कामों का जिक्र कर रहे थे. इसी बीच सबसे पीछे खड़े एक युवक ने सवाल कर दिया कि बेरोजगारों के लिए क्या किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने उसे आगे आने कहा जिसपर युवक आकर जवाब सुनने के बजाय बेरीकेडिंग पर चढ़कर जय श्रीराम के नारे लगाने लगा.अखिलेश यादव ने बताया कि दो दिन पहले किसी ने कॉल कर जान से मारने की धमकी दी थी.

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