सच-झूठ के फैसले में चंद्रशेखर जी का सपना ध्वस्त!

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दिल्ली के आइटीओ स्थित नरेंद्र निकेतन में चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सेंटर फॉर अप्लाइड पॉलिटिक्स (सीएपी) को शुक्रवार को शहरी विकास मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) अपने कब्जे में ले लिया है. बताया जा रहा है कि 12 फरवरी को सेंटर से जुड़े पदाधिकारियों को पत्र लिखकर एलएंडडीओ की ओर से परिसर को खाली करने का आदेश दिया था. एलएंडडीओ की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि शुक्रवार सुबह 11 बजे अधिकारी मौके पर पहुंचकर कब्जा लेंगे, आदेश के अनुसार तय समय पर पहुंचे अधिकारियों ने कब्जा ले लिया. संस्था की शुरुआत 22 सितंबर 1966 को समाजवादी अशोक मेहता ने की थी, चंद्रशेखर 1975 में इसके अध्यक्ष बनाये गए और अपने जीवन के अंत तक वो इस संस्था के अध्यक्ष रहे. यहीं पर समाजवादी जनता पार्टी चंद्रशेखर का भी दफ्तर है, जो 1999 में, सेंटर ऑफ एप्लाइड पॉलिटिक्स के प्रांगण में चलता रहा.

इस भवन में चंद्रशेखर के सेंटर फॉर अप्लाइड पॉलिक्टिस के अलावा नरेंद्र निकेतन केंद्र और समाजवादी जनता पार्टी का केंद्रीय कार्यालय भी संचालित किया जा रहा था. साल 1978 में इस भवन की स्थापना की गई था. सेंटर फॉर अप्लाइड पॉलिक्टिस संस्था के महासचिव एचएन शर्मा का  आरोप है कि कुछ लोगों ने इस कार्यालय में अवैध रूप से कब्जा जमाया हुआ था और उनके साथ दिल्ली के कुछ बड़े बिल्डर भी मिले हुए थे. यदि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय उनकी संस्था को भूमि आवंटित करता है तो वह सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और इस जमीन पर सेंटर फॉर अप्लाइड पॉलिटिक्स का कार्यालय खोलेंगे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज के आधार पर इस भूमि पर कब्जा जमाना चाह रहे थे.
जबकि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने जिस समाजवादी जनता पार्टी की स्थापना की थी उसके महासचिव श्याम जी त्रिपाठी का कुछ और ही कहना है कि यहां पर लंबे समय से कार्यालय चल रहा था. साथ ही सेंटर फॉर अप्लाइड पॉलिटिक्स के कार्यालय के साथ ही यंग इंडिया पत्रिका का भी प्रकाशन यहीं से होता था.

2007 में चंद्रशेखर जी की मृत्यु के बाद सेंटर ऑफ एप्लाइड पॉलिटिक्स की गवर्निंग बॉडी की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई कमिटी बनी थी। 2007 से 2017 के बीच अनेकों फर्जी कमिटी बनाकर रजिस्टर्ड करवाने का प्रयास किया गया. कौन सच्चा है कौन झूठा इसके चक्कर में यह कार्रवाही तो हो गई लेकिन अपने अख्खड़ स्वभाव के लिए चर्चित पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के धरोहर का यूं सड़क पर बिखर जाना हर एक समाजवादी और पूर्वांचलियों को जरूर होगा.

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